Homeइस्लामTaraweeh ka Bayan: तरावीह का बयान दलील हिंदी में

Taraweeh ka Bayan: तरावीह का बयान दलील हिंदी में

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Taraweeh ka Bayan: तरावीह का बयान दलील हिंदी में
taraweeh ki namaz ka tarika

तरावीह का बयान (Taraweeh ka Bayan)

तरावीह की नमाज मर्द और औरत सब के लिए सुन्नते मुअक्किदह है तरावीह की नमाज छोड़ना जाईज नहीं औरत घरो में अकेले तरावीह की नमाज पढ़े मस्जिद में न जाए घर में भी औरत तरावीह की नमाज जमाअत से न पढ़े क्योकि औरत की जमाअत मकरूहे तहरिमी व् गुनाह है (दुर्रे मुख़्तार जिल्द १ पृ० ४७२) नमाज पढ़ने का तरीका क्लिक से

Taraweeh ki namaz ka Tarika (तरावीह की नमाज का तरीका)

  • तरावीह की नमाज बीस रकआत की होती है जिसे दस सलाम में पढ़ा जाए यानी हर दो रकआत पर सलाम फेर दे
  • हर चार रक्आत तरावीह की नमाज मुकम्मल होने के बाद इतनी देर बैठना मुस्तहब है जितने देर में चार रकात तरावीह की नमाज पढ़ी है और इख़्तियार है इतनी देर चाहे चुप बैठा रहे चाहे कलिमा या दुरुद शरीद पढता रहे या कोई भी दुआ पढता रहे आम तौर पर यह दुआ पढ़ी जाती है

Tasbeeh e Taraweeh Ki Dua in Hindi (Taraweeh ka Bayan)

तरावीह की नमाज की चार रकआत नमाज मुकम्मल हो जाने के बाद आपको यह दुआ पढना चाहिए Tasbeeh e Taraweeh Ki Dua in Hindi:-

सुब्हा-नल मलिकिल क़ुद्दूस * सुब्हा-न ज़िल मुल्कि वल म-ल कूत * सुब्हा-न ज़िल इज्जती वल अ-ज़-मति वल-हैबति वल क़ुदरति वल-किब्रियाइ वल-ज-ब-रुत * सुब्हा-नल मलिकिल हैय्यिल्लज़ी ला यनामु व ला यमूत * सुब्बुहुन कुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर्रूह * अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन्नारि * या मुजीरु या मुजीरु या मुजीर

Tasbeeh e Taraweeh Ki Dua in Hindi

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  1. अगर आप सुरह फातिहा 3 बार पढ़ते है ऐसे में सवाब दो बार कुरआन शरीफ पढने के बराबर है (तफ्सीर मजहरी)
  2. आयतल कुर्सी चार बार पढने का सवाब एक बार कुरआन मजीद पढने के बराबर है (तफ्सीर मवाहिबुर रहमान)
  3. अगर कोई सुरह कद्र चार बार पढता है ऐसे में सवाब एक बार कुरआन पढने के बराबर है (फिरदौस वैलमी)
  4. सुरह जिल्जाल दो बार पढने का सवाब एक बार कुरआन मजीद पढने के बराबर है (तफ्सीर मवाहिबुर्रहमान)
  5. सुरह तकासुर एक बार पढने का सवाब एक बार कुरआन मजीद पढने के बराबर है (मिश्कात शरीफ)
  6. अगर कोई सुरह काफिरून चार बार पढता है ऐसे में सवाब एक बार कुरआन मजीद पढने के बराबर है (तिरमिजी शरीफ)
  7. सुरह नस्र चार बार पढने का सवाब एक बार कुरआन शरीफ पढने के बराबर है (तिरमिजी शरीफ)
  8. सुरह इख्लाश तीन बार पढ़ने का सवाब एक बार कुरआन मजीद के बराबर है (बुखारी शरीफ)
  9. अगर कोई सुरह आदियात दो बार पढता है ऐसे में सवाब एक बार कुरआन मजीद पढने के बराबर है

महत्वपूर्ण: अगर आप केवल इतना पढ़ लेते है तो कुरआन शरीफ पढने और एक हजार आयतों के पढने के बराबर सवाब पा सकता है साथ ही इन सूरतो को पढ़कर आप अपने खानदान के मरहूमीन और तमाम मरहूमीन की रूह को इसाले सवाब के लिए दुआ कर सकते है

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