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Talak Lene ka Process: अगर पत्नी तलाक न दे तो क्या करें?

Talak Lene ka Process Kya Hai in Hindi (अगर पत्नी तलाक न दे तो क्या करें ): किसी भी रिश्ते को जोर जबरजस्ती चलाना सही नहीं है क्योकि ऐसे में यह एक बोझ लगने लगता है इस कारण अपराध का भी जन्म होता है इसलिए अगर पति एंव पत्नी अगर रिश्ते को आगे तक निभाने तक सहमत न हो तो तलाक ले लेना चाहिए लेकिन ऐसा कई बार देखा गया है पत्नी तलाक के लिए राजी नहीं होती है एंव पति के जीवन को नरक बनाये रखना चाहती है ऐसे में यह लेख अगर पत्नी तलाक न दे तो क्या करें? तलाक लेने की का प्रोसेस (Talak या divorce Lene ka Process Kya Hai in Hindi) क्या है जाने?

तलाक लेने का प्रोसेस क्या है? Talak Lene ka Process In Hindi

अगर पति अपने पति से तलाक लेना चाहता है लेकिन पत्नी तलाक नहीं चाहती है ऐसे में आप धारा 13 (1) तलाक के नियम का पालन कर सकते इसमें कुल 15 आधार होते है जब कोई पत्नी तलाक न दे धारा 13 (1) तलाक लेने का प्रोसेस (Talak Lene ka Process Kya Hai) किया जा सकता है

यह पढ़े: तलाक के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

धारा 13 (1) तलाक, पति को 11 आधार प्रदान करता है इन्ही को आधार बनाकर पत्नी से तलाक लिया जा सकता है लेकिन पत्नी को 4 और तलाक आधार प्राप्त है आगे जाने पति के धारा 13 (1) तलाक के आधार क्या है एंव पत्नी को 4 अलग से क्या आधार मिले हुए है

  • जारता
  • क्रूरता
  • अभित्याग
  • धर्म-परिवर्तन
  • मस्तिष्क विकृत्त्ता
  • कोढ़
  • रतिजन्य रोग
  • संसार परित्याग
  • प्रकल्पित मृत्यु
  • न्यायिक प्रथक्करण
  • दांपत्य अधिकारों के पुनर्स्थापन की आज्ञप्ति का पालन न करना

पत्नियों के लिए अलग से बनाये हुए आधार

  • बहुविवाह बलात्कारया रेप
  • गुदा मैथुन अथवा पशुगमन
  • भरण पोषण की डिक्री
  • यौवन का विकल्प

धारा 9 दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन (हिन्दू मैरिज एक्ट)

अगर आप पत्नी से तलाक लेना चाहते है लेकिन आपको लगता है आपकी पत्नी साधारण तलाक के मुक़दमे से नहीं मानेगी या फिर आप मुकदमा नहीं जीत सकते है या आपके पास पत्नी के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है ऐसे में आपको लगता है आप केस हार सकते है ऐसे में आपको इस धारा 9, दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन (हिन्दू मैरिज एक्ट ) का सहारा लेना चाहिए (Restitution of conjugal rights in hindu Law)

  • धारा 9, दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन (हिन्दू मैरिज एक्ट ) आपको अधिकार देता है अपनी पत्नी को घर लाने का, ऐसे में आप इसके लिए एक केस कर सकते है
  • आपसी मतभेद के कारण आपकी पत्नी आसानी से आपके पास नहीं आना चाहेगी जिसका फायदा आप उठा सकते है
  • अगर आप साबित कर देते है कि मै किसी प्रकार की गलती नहीं किया हूँ और मेरी शादी होने के कारण, कानून मुझे हक़ देता है मेरी पत्नी मेरे साथ रहे एंव मुझे दाम्पत्य सुख देना चाहिए जो अभी वह नहीं दे रही है
  • अगर आप इस आधार पर डिक्री आपको मिलता है एंव आपकी पत्नी आपके साथ आकर नहीं रहती है ऐसे में इस डिक्री के आपके पास होने से, अपनी पत्नी से तलाक का कानूनी अधिकार मिल जाता है
  • इस डिक्री के आधार पर आप अपनी पत्नी से आसानी से तलाक ले सकते है

धारा 3 दहेज प्रतिरोधी अधिनियम

धारा 3 दहेज़ से सम्बंधित धारा है चलिए जानते है धारा 3 दहेज प्रतिरोधी अधिनियम से आपको कैसे फायदा मिल सकता है

  • अगर आपकी पत्नी ने आपके ऊपर केस में यह कही भी लिखा है कि शादी के पहले एंव शादी के बाद, आपकी मांग पर दहेज़ दिया है
  • ऐसे में इस धारा के तहत 5 साल की सजा एंव 15 हजार से लेकर दहेज़ के समान की वैल्यू का जुर्माना करवा सकते है
  • ऐसा इसलिए क्योकि यह धारा कहती है दहेज़ लेना एंव देना जुर्म है ध्यान रहे इसमें आपको नहीं कहना मैंने दहेज़ लिया है
  • अगर आपकी पत्नी ने कही लिखा है मैंने दहेज़ दिया है ऐसा कहने भर से उन्हें जेल तक पहुंचा सकते है

घरेलू हिंसा का केस (Talak Lene ka Process)

अगर आपकी मां एंव बहन आपके साथ रहती है ऐसे में मां एंव बहन की तरफ से अपनी पत्नी पर घरेलु हिंसा का केस करवा सकते है

  • घरेलु हिंसा का केस पत्नी ही नहीं आपकी माँ एंव बहन भी कर सकती है जैसे आपकी पत्नी उस घर में बहु है वैसे ही आपकी माँ भी उस घर में बहु है.
  • घरेलू हिंसा केस से मतलब है की एक घर में रहने वाले लोग आपस में ये केस कर सकते है. ये केस सिर्फ महिला ही कर सकती है, पुरुष को कोई आधिकार नही है
  • माँ एंव बहन को परेशान किया है/ गाली दी है /पिता है खाना नही दिया या फिर ताने दिए है. इन आधारों पर ये केस आप करवा सकते है. इससे आपकी पत्नी हतास हो जाएगी और दबाव में आ जाएगी
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