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रोजा इफ्तार की दुआ हिंदी में Roza Iftar ki Dua Hindi Mein

रोजा इफ्तार की दुआ हिंदी में Roza Iftar ki Dua Hindi Mein: रमजान का पाक महीना 02/04/2022 से शुरू हो रहा है ऐसे में मुस्लिम समुदाय के भाई बहन रमजान के रोजे की तैयारी में है इफ्तार की दुआ हिंदी में (Roza Iftar ki Dua Hindi Mein), रोजा खोलने की दुआ हिंदी उर्दू में, बता रहे है रोजा खोलने का टाइम टेबल क्या है पहले ही बताया था इस लेख में रोजा (इफ्तार) खोलने की दुआ हिंदी में आगे जाने

रमजान रोजा रखने की दुआ

रमजान के महीने का मुस्लिम समुदाय के हर एक मुस्लिम को इन्तेजार रहता है क्योकि रमजान एक पाक महीना होने के साथ साथ नेकी और बरकतों का महीना है रमजान के महीने में हर एक नेकी का बदला 70 गुना होता है ऐसे में इस्लाम धर्म के मानने वाले सभी भाई बहन 30 दिन का रमजान का रोजा रखने के साथ साथ तरावीह की नमाज पढ़ते है इस्लाम धर्म के ऐसे तो 5 वक्त की नमाज पढ़ी जाती है लेकिन रमजान के महीने में तरावीह की नमाज पढ़ा जाता है

मुस्लिम समुदाय के लोग सूरज निकलने से पहले रोजा (सेहरी) रखने की नियत करते है और हल्का भोजन करते है इसके बाद पुरे दिन न ही कुछ खाते है न ही जल ग्रहण करते है दिन भर रोजा रखने के बाद करीब सूरज ढलने के समय इफ्तार का समय होता है ऐसे में इफ्तार की दुआ ( रोजा खोलने की दुआ) करते है और इफ्तार करके ईशा की नमाज मुकम्मल करने के लिए मस्जिद में जाते है

रोजा इफ्तार की दुआ हिंदी उर्दू में (roza iftar ki dua hindi mein)

रोजा इफ्तार की दुआ क्या है? आगे बताया गया है लेकिन उससे पहले आपको बताना चाहेंगे रोजा (सेहरी) रखने की दुआ हिंदी उर्दू में पहले ही बताया गया है उसे भी आप यहाँ क्लिक से पढ़ सकते है

रोजा खोलने की दुआ हिंदी में

रोजा खोलने की दुआ कब पढ़ना चाहिए? इफ्तार से पहले या बाद में, बहुत से मुस्लिम भाई यह सवाल करते है ऐसे में आपको बता दे रोजा खोलने की दुआ इफ्तार करने के बाद पढ़ना चाहिए और इफ्तार की शुरुवात बिस्मिल्लाह हिर रहमान निर रहीम पढ़कर करना चाहिए

” अल्लाहुमा लका सुमतु व बि क आमन्तू – व अलै क तवककल्तु व अला रिजि का अफ्तरतो “

इफ्तार की दुआ हिंदी में

रोजा खोलने की दुआ उर्दू में

اَللّٰهُمَّ اِنِّی لَکَ صُمْتُ وَبِکَ اٰمَنْتُ وَعَلَيْکَ تَوَکَّلْتُ وَعَلٰی رِزْقِکَ اَفْطَرْتُ

इफ्तार की दुआ उर्दू में

रोजा इफ्तार रखने खोलने की दुआ हिंदी उर्दू में

रमजान का रोजा सहरी से शुरू होता है एंव इफ्तार पर ख़त्म होता है रमजान का मुबारक महीना साल में एक बार आता है इसलिए बहुत से लोग जो रोजा रखना चाहते है वह रमजान में रोजा की नियत रोजा रखने की दुआ, रोजा खोलने की दुआ इत्यादि भूल जाते है ऐसे में गूगल पर आप सर्च करते है जैसे:-

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रोजा रखने के फायदे और नुकसान

रमजान का रोजा सभी मुस्लिम भाई बहन रखते है लेकिन रोजा रखने से शारीरिक और मानसिक फायदे भी होते है आगे जाने रोजा रखने के फायदे और नुकसान क्या है?

  • रोजा रखने से सबसे पहला फायदा अल्लाह पाक आपसे खुश होता है और आप पर अल्लाह की रहमत एंव हर एक नेकी का बदला 70 गुना मिलता है
  • रमजान का रोजा बरकत का महीना है ऐसे में दिन भर रोजा रखकर शाम को ईशा एंव तरावीह की नमाज पढ़कर आप अपने सभी पिछले गुनाह की माफ़ी मागते है तो इस बरकत के महीने में अल्लाह पाक आपके गुनाह को माफ़ कर देता है क्योकि यह बरकत का महीना है एंव अल्लाह पाक बेशक रहम दिल वाला
  • रोजा रखने से शारीरिक फायदा भी है जैसे दिन भर रोजा रहने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है एंव दिल से जुडी बीमारी को इससे काफी फायदा मिलता है
  • रोजा रखने से गरीब जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है उनके भूख प्यास का एहसास होता है ऐसे में दान पुण्य पैसे वाले करते है और इस्लाम में जकात फितरा, दान पुण्य को इस नाम से जानते है
  • रोजा रखने के नुकसान कुछ नहीं है लेकिन रोजा रखने के लिए अल्लाह पाक का डर इस्लाम धर्म से प्रेम होना जरुरी है क्योकि ऐसे बहुत से मुस्लिम भाई रोजा नहीं करते है साथ ही वह रोजेदार के सामने खाते पीते है ऐसे करने से बचे और रमजान के 29 या 30 रोजे रखने की नियत करे
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