Homeइस्लाममुहर्रम का रोजा रखने की नियत Muharram Ke Roze Ki Niyat Hindi

मुहर्रम का रोजा रखने की नियत Muharram Ke Roze Ki Niyat Hindi

मुहर्रम का रोजा रखने की नियत Muharram Ke Roze Ki Niyat in Hindi : इस्लाम में रमजान रोजा और मुहर्रम का रोजा की काफी अहमियत और अफजल इबादतों में से एक है Muharram Ke Roze रखना सुन्नत रोजा माना जाता है साथ ही इस रोजा को नफिल रोजा के नाम से भी जाना जाता है हुजुर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रमजान का रोजा रखा था इसलिए मुस्लिम भाई भी इस सुन्नत को पूरा करते है और मुहर्रम का रोजा रखते है इसलिए मुहर्रम का रोजा रखने की नियत करके रोजा रखते है आगे जाने Muharram Ke Roze Ki Niyat, fazilat, Dua Traika in Hindi

मुहर्रम का रोजा रखने की नियत

Muharram Ke Roze Ki Niyat Hindi: रोजा रमजान का हो या मुहर्रम का, इस्लाम में सभी रोजा रखने का तरीका एक जैसा है अगर आप रोजा सुन्नत, फर्ज या नफिल का रखना चाहते है तो निम्नवत बताये गए तरीके से रोजा की नियत करे जिस तरह आप रमजान मुबारक का रोजा की नियत करते है ठीक उसी तरह से आपको मुहर्रम का रोजा रखने की नियत करे

Muharram Ke Roze Ki Niyat Hindi

  • सबसे पहले 10वी मुहर्रम की सेहरी करे
  • सेहरी करने के बाद मुहर्रम का रोजा रखने की नियत करे
  • नियत करने के बाद फज्र की नमाज अदा करे अगर यह नमाज मस्जिद में अदा हो तो काफी बेहतर
  • जिस तरह रमजान मुबारक महीने में रोजा रखने के बाद अल्लाह की इबादत करते है ठीक इसी तरह से मुहर्रम रोजा शुरू होने के बाद अल्लाह की इबादत में पूरा दिन गुजारे
  • इस तरह से आप मुहर्रम का रोजा सेहरी से शुरू करके इफ्तार करके रोजा खोले इसके लिए रोजा खोलने की दुआ करे इस तरह से आप मुहर्रम का रोजा रखे और मुहर्रम रोजा की फ़ज़ीलत (muharram ke roze ki fazilat in hindi) से मालामाल होए

मुहर्रम के रोजे की फजीलत

Muharram ke roze ki fazilat in hindi: 10वी मुहर्रम को यौम ए आशुरा के नाम से भी जाना जाता है इस्लाम के इतिहास में इस दिन का बहुत ही अहमियत है क्योकि इसी दिन इस्लाम में बहुत से ऐसे वाक्यात हुए जो इस दिन बहुत ही खास बनाते है मुहर्रम के रोजे की फजीलत ( Muharram ke roze ki fazilat )

Muharram ke roze ki fazilat in Hindi

यौम ए आशुरा या फिर मुहर्रम का रोजा रखने की फजीलत (Muharram ke roze ki fazilat in Hindi) निम्नवत है:-

  • दुआ कबूल होगा
  • तौबा कबूल होगा
  • रोजी रोटी में बरकत होगा
  • इस दिन रोजा रखने और अल्लाह की इबादत करने से ढेरो सवाब और नेकिया आपको हासिल होगा

मुहर्रम के रोजा रखने खोलने की दुआ

मेरे इस्लामिक भाइयो कोई भी रोजा जैसे रमजान का रोजा, शबे बारात, शबे मेराज एंव मुहर्रम का रोजा रखने खोलने या फिर नियत का तरीका एक ही जैसा होता है ऐसे में आप निम्नवत तरीके से मुहर्रम के रोजे रखने खोलने की दुआ कर सकते है:-

Muharram ka roza rakhne ki niyat dua in Hindi (मुहर्रम का रोजा)

रमजान का रोजा फर्ज है ऐसे में आप रमजान की नियत आप कभी भी सुबह में उठ कर सकते है लेकिन बाकी 11 महीने के कोई भी रोजा नफिल रोजा होता है ऐसे में आपको नफिल रोजा की नियत आपको रात में ही सोने से पहले कर लेना चाहिए इस तरह से आप मुहर्रम का रोजा रखने की नियत दुआ कर सकते है

मुहर्रम का रोजा की नियत – नियत करता हूं मैं माहे 10 मुहर्रम उल हराम का रोजा वास्ते अल्लाह तआला के।

Muharram ka roza rakhne ki niyat
Muharram ka roza rakhne ki niyat dua in Hindi

Muharram ka roza Kholne ki niyat dua in Hindi

जिस तरह से आप रमजान के महीने में रोजा खोलने की दुआं करते है ठीक इसी तरह से आप मुहर्रम का रोजा खोलने की दुआ या नियत करे इस तरह से आप मुहर्रम का रोजा खोल सकते है

Muharram ka roza Kholne ki niyat

“अल्लाहुम्मा इन्नि लका सुम्तु वा आला रिज़्क़-इका-आफ़तरतु” है

Muharram Ke Roze Ki Niyat Dua in Hindi
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