Homeइस्लाममुहर्रम कब, क्यों मनाया जाता है का इतिहास 2022 इन हिंदी

मुहर्रम कब, क्यों मनाया जाता है का इतिहास 2022 इन हिंदी

मुहर्रम कब है क्यों मनाया जाता है मुहर्रम का इतिहास 2022, 2023 इन हिंदी (muharram kab aur kyon manaya jata hai) : रमजान पाक का महिना ख़त्म होते ही तीन सवाल अक्सर पूंछा जाता है। मोहर्रम (मुहर्रम) कब है, ईद कब है, बकरा ईद कब है 2022 ऐसे में आज मोहर्रम से जुड़े सवालों का सवाब देने का प्रयास कर रहे है। जैसे: मोहर्रम कब है? मुहर्रम क्यों मनाया जाता है, मुहर्रम का इतिहास इन हिंदी। (muharram kab hai aur kyon manaya jata hai 2022)

मोहर्रम (मुहर्रम कब है 2022….?

muharram kab aur kyon manaya jata hai: मुहर्रम क्यों मनाया जाता है, मुहर्रम का इतिहास इन हिंदी में जानकारी लेने से पहले जानते है मुहर्रम (ताजिया) कब है 2022? मुहर्रम का फोटो विडिओ इत्यादि सबकी जानकारी इस लेख में देने का प्रयास रहेगा, चलिए जानते ताजिया मुहर्रम क्यों मनाया जाता है?

इंडिया (भारत) में मुहर्रम कब है साल 2022मुहर्रम कब है दिन 20222022 में मोहर्रम कितने तारीख को है
2022 में मुहर्रम/ताजिया कब हैमंगलवार के दिन है9 अगस्त 2022 को मुहर्रम है
2023 में मुहर्रम/ताजिया कब हैशनिवार के दिन है29 जुलाई 2022 को मुहर्रम है
2024 में मुहर्रम/ताजिया कब हैबुधवार के दिन है27 जुलाई 2022 को मुहर्रम है
2025 में मुहर्रम/ताजिया कब हैदिन अपडेट किया जा रहातारीख अपडेट किया जा रहा
2026 में मुहर्रम/ताजिया कब हैदिन अपडेट किया जा रहातारीख अपडेट किया जा रहा
2027 में मुहर्रम/ताजिया कब हैदिन अपडेट किया जा रहातारीख अपडेट किया जा रहा
मोहर्रम (ताजिया) कब है 2022

मुहर्रम/ताजिया कब है 2022, 2023, 2024, 2025, 2025, ….?

muharram kab manaya jata hai 2022: मुहर्रम का महीना शुरू होने के बाद मोहर्रम की दसवीं तारीख कब है सवाल किया जाता है। ऐसे में आपको बता दे 2022 में मुहर्रम 9 अगस्त को दिन मंगलवार को मनाया जायेगा, आगे जाने मुहर्रम के बारे में क्या जानकारी सर्च करते है लोग।

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मुहर्रम क्यों मनाया जाता है हिंदी में

muharram kyu manaya jata hai in hindi: इस्लाम धर्म के प्रमुख त्यौहार है साथ ही इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, मुहर्रम का महीना हिजरी संवत् का प्रथम महीना है। इस्लाम धर्म के पैगम्बर मुहम्मद साहब ( सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उर्दू अरबी صَلَّىٰ ٱللَّٰهُ عَلَيْہِ وَآلِہِ وَسَلَّمَ) के नवासे इमाम हुसैन (रजी0) एंव उनके साथियों की शहादत इसी महीने में हुई थी। ऐसे में इस्लाम धर्म के अनुयायी, मुहर्रम को इमाम हुसैन (रजीo) के शहीद होने के गम में मनाते है। आगे जाने मुहर्रम/कर्बला का बयान/वाक्या की जानकारी।

मुसलमानों द्वारा मुहर्रम क्यों मनाया जाता है?

muharram kab se manaya jata hai: मुहर्रम पैगम्बर मुहम्मद साहब ( सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उर्दू अरबी صَلَّىٰ ٱللَّٰهُ عَلَيْہِ وَآلِہِ وَسَلَّمَ) के नवासे इमाम हुसैन (रजीo) के शहादत के गम में मनाया जाता है। मुहर्रम के महीने में मुहर्रम के महीने में मुस्लिम भाई बहन १० दिन का रोजा रखते है। जो १० दीन का रोजा नहीं रख पाते वह मुहर्रम की ०९ तारीख एंव १० तारीख को रोजा रखते है। इमाम हुसैन (रजीo) पर, यजीद नाम का बादशाह ने पानी पर रोक लगा दिया था। ऐसे में कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (रजीo) एंव साथियों को एक बूंद पानी तक नहीं मिला और बिना पानी के ही शहादत का जाम पी गए। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन अपने घर के आसपास जगह जगह पानी के प्याऊ और शरबत की गगरी इत्यादि रखते है। जिसे कोई भी राहगीर प्यास लगने पर पी सकता है।

मुहर्रम का इतिहास इन हिंदी

muharram ka itihas in hindi: मुहर्रम का वाक्या कर्बला के मैदान से शुरू होता है। जिसे आज ईराक के नाम से जाना जाता है। कर्बला का वाक्या जब शुरू हुआ। उस समय वह का बादशाह या खलीफा यजीद था। वह सत्ता के नशे में खुदाई का दावा कर बैठा वह चाहता था। मुहम्मद साहब ( सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उर्दू अरबी صَلَّىٰ ٱللَّٰهُ عَلَيْہِ وَآلِہِ وَسَلَّمَ) के नवासे इमाम हुसैन भी उसे खलीफा माने, जिससे उसका वर्चस्व पुरे अरब में फ़ैलना शुरू हो जाए, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती मुहम्मद साहब ( सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उर्दू अरबी صَلَّىٰ ٱللَّٰهُ عَلَيْہِ وَآلِہِ وَسَلَّمَ) के के एकलौते चिराग इमाम हुसैन (रजीo) थे। जो यजीद के सामने किसी भी हालत झुकने को तैयार नहीं थे। इसके कारण यजीद के जुल्म एंव अत्याचार बढ़ते जा रहे थे।

"क़त्ल-ए-हुसैन अस्ल में मर्ग-ए-यज़ीद है
इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद"

कर्बला का वाकया इमाम हुसैन (रजीo) का (मुहर्रम कब है)

karbala ka waqia in hindi: जब यजीद के जुल्म अत्याचार बढ़ने लगे ऐसे में वहा के खलीफा इमाम हुसैन (रजीo) अपने पुरे परिवार के साथ मदीना शहर से ईराक शहर के कुफा जाने लगे। रास्ते में ही यजीद की फ़ौज, कर्बला के रेगिस्तान (स्थान) पर इमाम हुसैन (रजीo) के काफिले को रोक दिया।

यह मुहर्रम के महीने का दूसरा दिन था। जब काफिले को रेगिस्तान में रोका गया। जहाँ पानी का एक मात्र स्रोत एक नदी थी। इस नदी पर भी यजीद ने अपनी फ़ौज लगा दी और अपने फ़ौज को हुक्म दिया था। इमाम हुसैन (रजीo) और उनके साथी जिसमे बच्चे, बूढ़े, बहन, माँ इत्यादि शामिल थे। किसी को भी पानी का एक कतरा न मिल पाए।

भूखे प्यासे इमाम हुसैन (रजीo) एंव उनके साथ कर्बला के मैदान में थे। यजीद के सामने फिर भी नहीं झुके ऐसे में यजीद की फ़ौज, इमाम हुसैन (रजीo) को कई बार यजीद को ईराक का बादशाह (जो खुदा होने का दावा करता था) मानने को कहा लेकिन इमाम हुसैन (रजीo) इस बात से राजी न हुए।

karbala ka waqia in hindi: ऐसे में यजीद की फ़ौज इमाम हुसैन (रजीo) के ७२ सिपाही (बच्चे, बूढ़े, माँ, बहन, भाई) से जंग का ऐलान किया जबकि इमाम हुसैन (रजीo) के साथीयो को प्यास की अलग तलब थी, फिर भी यजीद के 80000 की फ़ौज, इमाम हुसैन (रजीo) के ७२ सिपाही को क़त्ल करने पर आमदा थी।

इमाम हुसैन (रजीo) जंग नहीं चाहते थे, लेकिन कोई रास्ता न बचने के कारण जंग करनी पड़ी। 80000 की फ़ौज के सामने ७२ सिपाही लड़ कर शहादत का जाम पी गए। जिसकी मिसाल दुशमन फ़ौज के सिपाही एक दसूरे को देने लगे क्योकि ऐसे भी बहुत से सिपाही थे। जो दिल से इमाम हुसैन (रजीo) से जंग नहीं चाहते थे। लेकिन पैसे का लालच कब किसका दिमाग नाश कर दे कोई नहीं जानता।

कर्बला के मैदान में शहीद हुए भाइयो एंव साथियो एंव अपने लख्ते जिगरो के शव को हर दिन जंग से उठाकर इमाम हुसैन (रजीo) दफनाते एंव आखिर दिन यानि दसवी मुहर्रम को अकेले जंग किया, लेकिन फिर भी यजीदी फ़ौज उन्हें मार न सकी।

आखिर में अस्र की नमाज अदा करते वक्त, जब इमाम हुसैन (रजीo) अल्लाह की इबादत के लिए, सज्दे की हालत में थे ऐसे में एक यजीदी को लगा यह एक सही समय है इमाम हुसैन (रजीo) को मारने का, फिर उसने धोखे से क़त्ल कर दिया।

karbala ka waqia in hindi: इमाम हुसैन (रजीo) हारकर भी जिन्दा है। उनकी याद में आज इस्लाम का बच्चा बच्चा कर्बला के मैदान को याद करता है। जबकि यजीद जीतकर भी हार गया क्योकि आज यजीद कमबख्त की कब्र कहा है किसी को पता नहीं।

जंग में यजीद की जीत हुई इमाम हुसैन (रजीo) की हार हुई और इमाम हुसैन (रजीo) के सभी साथी शहादत का जाम पी गए। शहादत से पहले ७२ में से किसी भी एक सिपाही को पानी का कतरा भी नसीब न हुआ। दस दिन की भूख प्यास तड़प उसके बाद शहादत का जाम पीकर अल्लाह के राह में मुहर्रम की दसवी तारीख को कुर्बान हो गए। कुछ ऐसी था कर्बला का वाकया इमाम हुसैन का (karbala ka waqia in hindi)

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